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title: "वट सावित्री व्रत कथा 2026: सावित्री ने कैसे यमराज से वापस लाए सत्यवान के प्राण, पढ़ें संपूर्ण पौराणिक कथा"
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date: 2026-05-16
modified: 2026-07-07
lang: en
author: "Purnima"
description: "वट सावित्री व्रत 2026 की पौराणिक कथा हिंदी में पढ़ें। जानें कैसे सावित्री ने अपने पतिव्रत और बुद्धिमानी से यमराज से सत्यवान के प्राण वापस पाए। पढ़ें व्रत का महत्व, पूजा विधि और कथा।"
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# वट सावित्री व्रत कथा 2026: सावित्री ने कैसे यमराज से वापस लाए सत्यवान के प्राण, पढ़ें संपूर्ण पौराणिक कथा

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भारत में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष धार्मिक महत्व है। यह व्रत पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन महिलाएं वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और सावित्री-सत्यवान की पवित्र कथा का श्रवण करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत और कथा के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।

## वट सावित्री व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में वट वृक्ष को त्रिदेवों का प्रतीक माना गया है। इसकी जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास माना जाता है। वट सावित्री व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है।

## सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा

प्राचीन समय में मद्र देश में अश्वपति नाम के एक प्रतापी राजा राज्य करते थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने वर्षों तक मां सावित्री की कठोर तपस्या की। देवी की कृपा से उन्हें एक तेजस्वी कन्या प्राप्त हुई, जिसका नाम सावित्री रखा गया।

जब सावित्री विवाह योग्य हुईं तो राजा अश्वपति ने उन्हें स्वयं अपने लिए वर चुनने की अनुमति दी। यात्रा के दौरान सावित्री की मुलाकात शाल्व देश के राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान से हुई। सत्यवान अत्यंत गुणवान, सत्यवादी और तेजस्वी थे। सावित्री ने उन्हें अपना पति चुन लिया।

जब सावित्री ने अपने पिता को सत्यवान के बारे में बताया, तभी वहां उपस्थित देवर्षि नारद ने कहा कि सत्यवान अल्पायु हैं और विवाह के एक वर्ष बाद उनकी मृत्यु निश्चित है। यह सुनकर राजा अश्वपति चिंतित हो गए और उन्होंने सावित्री को निर्णय बदलने के लिए कहा। लेकिन सावित्री ने दृढ़ निश्चय के साथ कहा कि एक बार जिसे पति मान लिया, उसे जीवनभर नहीं बदल सकतीं।

## सत्यवान की मृत्यु का दिन

विवाह के बाद सावित्री अपने पति सत्यवान और सास-ससुर के साथ वन में रहने लगीं। समय बीतता गया और वह दिन भी आ गया जिसकी भविष्यवाणी नारद मुनि ने की थी।

उस दिन सावित्री ने कठोर व्रत रखा। सत्यवान लकड़ी काटने वन में जा रहे थे तो सावित्री भी उनके साथ चली गईं। जंगल में काम करते समय अचानक सत्यवान के सिर में तेज पीड़ा हुई और वे सावित्री की गोद में सिर रखकर लेट गए। कुछ ही देर में उनके प्राण निकल गए।

तभी यमराज वहां प्रकट हुए और सत्यवान की आत्मा लेकर दक्षिण दिशा की ओर चल पड़े। सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चलने लगीं।

## सावित्री की बुद्धिमानी और पतिव्रता धर्म

यमराज ने सावित्री को वापस लौटने के लिए कहा, लेकिन सावित्री ने धर्म, सत्य और पतिव्रता के महत्व पर ऐसी बातें कहीं कि यमराज प्रसन्न हो गए। उन्होंने सावित्री को एक वरदान मांगने को कहा।

सावित्री ने पहले वरदान में अपने अंधे सास-ससुर की आंखों की रोशनी और उनका खोया हुआ राज्य वापस मांगा। यमराज ने वरदान दे दिया।

फिर भी सावित्री पीछे चलती रहीं। यमराज ने दूसरा वरदान देने को कहा। सावित्री ने अपने पिता के लिए सौ पुत्रों का वरदान मांगा। यमराज ने यह भी स्वीकार कर लिया।

तीसरी बार यमराज ने कहा कि अब लौट जाओ। तब सावित्री ने कहा कि मुझे सत्यवान से सौ पुत्र प्राप्त हों। यमराज ने यह वरदान भी दे दिया, लेकिन तुरंत उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ क्योंकि पति के बिना पुत्र कैसे संभव थे।

सावित्री की बुद्धिमानी, निष्ठा और पतिव्रता धर्म से प्रभावित होकर यमराज ने सत्यवान के प्राण वापस लौटा दिए। इस प्रकार सावित्री ने अपने अटूट प्रेम और तपस्या से अपने पति को पुनर्जीवित कर लिया।

## वट सावित्री व्रत से मिलने वाले फल

मान्यता है कि जो महिलाएं श्रद्धा और नियमपूर्वक वट सावित्री व्रत करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार में समृद्धि प्राप्त होती है। यह व्रत पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और समर्पण को मजबूत करने वाला माना जाता है।

## वट सावित्री पूजा में क्या करें

- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें

- वट वृक्ष की पूजा करें

- पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत बांधें

- सावित्री-सत्यवान की कथा पढ़ें या सुनें

- भगवान विष्णु, यमराज और वट वृक्ष की पूजा करें

- पति की लंबी आयु की कामना करें

## वट सावित्री व्रत की सीख

वट सावित्री व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी शक्ति, समर्पण और अटूट विश्वास की प्रेरणादायक कथा है। सावित्री ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चे प्रेम, तपस्या और बुद्धिमानी के आगे मृत्यु भी झुक सकती है। यही कारण है कि आज भी यह व्रत भारतीय संस्कृति में विशेष श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।

अगर आप वट सावित्री व्रत कर रही हैं, तो पूजा के दौरान इस कथा का पाठ अवश्य करें। ऐसी मान्यता है कि कथा सुनने और पढ़ने से व्रत पूर्ण फलदायी होता है।